कलाकृति क्रमांकBJK01
यमुना के संग एक पल
सजी हुई नाव में साथ बैठे राधा और कृष्ण, चारों ओर कमल, मोर और तट के मंदिर। रंगों का कोमल स्पर्श बारीक उभरी हुई नक्काशी में आत्मीयता भरता है।
भक्ति, संगीत और उत्सव के चार दृश्य।
सजी हुई नाव में साथ बैठे राधा और कृष्ण, चारों ओर कमल, मोर और तट के मंदिर। रंगों का कोमल स्पर्श बारीक उभरी हुई नक्काशी में आत्मीयता भरता है।
नदी किनारे फूलों से सजे उत्सव में कृष्ण बाँसुरी बजा रहे हैं। पुष्पमालाएँ, बिखरी पंखुड़ियाँ और परिधानों की महीन नक्काशी इस दृश्य को जीवंत बनाती है।
एक पतली नाव पर नृत्य करते राधा और कृष्ण, ऊपर बादलों से बरसते फूल। बादलों पर विराजमान देवी-देवता, कमल और दूर के मंदिर इस आनंदमय भक्ति दृश्य को पूरा करते हैं।
सजी हुई नाव पर सखियों के साथ बाँसुरी बजाते कृष्ण और राधा की कई युगल आकृतियाँ दिखाई देती हैं। नक्काशीदार छतरी, लटकती मालाएँ और मोर के आकार के छोर इस दृश्य को गति और संगीत का भाव देते हैं।